भारत का इतिहास 1858 से1950 तक पार्ट 3

हेलो दोस्तों भारत का इतिहास 1858 से1950 तक पार्ट 3 मे आपका स्वागत है।  पार्ट 3 हम शुरू करने जा रहे हैं .                                       वेल्लोर का  ग़दर( 1806) _                             " उनकी भारतीय भावनाओं को कल्पनातीत आज्ञाओ से चोट पहुंचाई गई।"                          इस समय विलियम बैंटिक मद्रास का गवर्नर था और सर जान कैडाक स्थानीय सेनाध्यक्ष था। नए अधिनियमों के अनुसार-" सिपाहियों को एक नए ढंग की पगड़ी पहनने, अपनी दाढ़ियों को एक विशेष प्रकार से रखने तथा मस्तक पर सांप्रदायिक चिन्ह न लगाने की आज्ञा दी गयी।"                                 10 जुलाई 1806 को सिपाहियों ने एकाएक वेल्लोर के किले पर धाबा बोल दिया। सावधान नहीं होने की वजह से ब्रिटिश कंपनी अधिक प्रतिरोध न कर सकी। सिपाहियों का किले पर अधिकार हो गया तथा इस मुठभेड़ में अंग्रेजों की दो कंपनियां, जिसमें 113 जवान तथा 14 अवसर थे, मार डाली गयी । समाचार मिलते ही अर्काट की सेना भेजी गई जिसने त्वरित कार्यवाही करके वेल्लोर पर वापस अधिकार कर लिया। अंग्रेजों ने' बदला लेने की शीघ्रता' की जिसके परिणाम स्वरूप कोर्ट मार्शल का नाटक करके फौजियों ने प्राय: सभी प्रमुख सिपाहियों को मृत्युदंड दे दिया। फिर भी अवसर और अधिक प्राण दंड देने के लिए मांग कर रहे थे तथा टीपू सुल्तान का जो परिवार वेल्लोर में बंदी था, उसे भी इस विद्रोह में घसीटना चाहते थे ।गवर्नर  जनरल सर जॉन शोर तथा लॉर्ड मिंटो ने इसमें बुद्धिमता पूर्ण संयम से काम लिया तथा बिना अधिक प्रतिघात के मामले को शांत कर दिया, परंतु यह सैनिक विद्रोह की एक गंभीर घटना थी व 1857 की  क्रांति के स्वरूप एवं कारणों से सदृश्य रखती थी। यह भारत के इतिहास 1858  से 1950 तक का पार्ट 3 है.    Part-4 में हम बैरकपुर का विद्रोह के बारे में बताएंगे.       धन्यवाद रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं😪😪😪😪😪💪🖐👌✋👍

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