भारत का इतिहास 1858 se 1950 tak part 1

1858 के पूर्व की स्थिति- भारत में ब्रिटिश राज्य के इतिहास में सन 1857 एक महत्वपूर्ण वर्ष है. इस वर्ष अंग्रेजों के विरुद्ध उन से छुटकारा पाने का एक सम्मिलित प्रयास हुआ. उसकी असफलता ने भारत की प्राचीन व्यवस्था का अंत कर दिया/ भारत में आधुनिक युग में प्रवेश किया. देश का नेतृत्व पुराने राजे- राजवाड़ा के हाथों से निकलकर आधुनिक पाश्चात्य प्रणाली से प्रशिक्षित युवा पीढ़ी के हाथों में आ गया और विरोध का क्षेत्र लड़ाई का मैदान में रहकर राजनीतिक हो गया/ अंग्रेजों के लिए श्री s.r. शर्मा के शब्दों में_'  यह एक प्रभावपूर्ण विजय थी- ऐसी विजय जिसने भारत में उनके साम्राज्य का अंत होने की अनिवार्यता की नीव डाल दी/" कंपनी की  स्वेच्छाचारी ता का अंत हुआ तथा ब्रिटिश शासन ने उदार होकर संवैधानिक प्रतिनिधिकशासन में बदलते हुए उत्तरदायी सरकार का रूप धारण किया जिसका पटाक्षेप1947मे भारत के स्वतंत्रता से हुआ/           1757 से 1857तक के सौ वर्ष जहां  एक ओर ईस्ट इंडिया कंपनी के अबाध गति से बढ़ते हुए साम्राज्य का इतिहास है, वहां इनका व्यक्तिगत अध्ययन यह भी दर्शाता है कि भारत में इन सौ वर्षों में अंग्रेजो के खिलाफ जहां-तहां विद्रोह होते रहे.

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Cricket ki knowledge

भारत का इतिहास1858 se 1950 tak part- 2